“पल”

0
205
हर पल की अजब कहानी है
हकीकत किसीने ना जानी है
इक पल  ले  आये खुशियां
दूजे पल आंखों में पानी है
हर पल इक जैसा रहता नहीं
अभी यहां तो अभी गया कहीं
पल किसी के बस आए नहीं
ये किसी के आगे झुका नहीं
अच्छा पल जब आए कभी
उसका भरपूर सम्मान करो
ना इतराओ ना घमंड करो
अच्छा पल ना रहता कभी
जब जब पल मुश्किल आएगा
मन विचलित ना तुम होने देना
मुश्किल को तुम चुनौती देना
मुश्किल पल भी टल जाएगा
बृज किशोर भाटिया,चंडीगढ़

LEAVE A REPLY

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.