चंडीगढ़
8 मार्च 2021
दिव्या आज़ाद

महिलाओं को ज़्यादातर अपने जीवन में अपनी बहुत सी इच्छाओं को मार कर जीना पड़ता था लेकिन बदलते दौर के साथ महिलाओं ने भी बदलाव का एक नया तरीका अपनाया है। जहां पहले देखा जाता था कि किसी न किसी कारण महिलाएं या तो अपना कैरियर या अपना पैशन छोड़ देती थीं। वहीं आज के दौर की महिला सब कुछ बैलेंस करके हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है।

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य पर हम चंडीगढ़ की ही ऐसी एक महिला की बात करेंगे जिन्होंने मेडिकल प्रोफेशन में होने के बावजूद सिंगिंग व राइटिंग के अपने पैशन को भी हमेशा ज़िंदा रखा और अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियां भी बखूबी निभाई।

चंडीगढ़ की डर्मेटोलॉजिस्ट रीटा दत्त पिछले 25 वर्षों से इस प्रोफेशन में काम कर अपनी एक अलग पहचान पहले से ही बना चुकी हैं। बचपन से ही उन्हें गाने व लिखने का शौक था। वे विभिन्न भाषाओं में गाती हैं।

उन्होंने हिन्दी, पंजाबी, अंग्रेज़ी , संस्कृत भाषा के अलावा तुर्की भाषा में भी गीत गाए हैं। वे गीत लिखती भी हैं और कंपोज भी करती हैं। हाल ही में उन्होंने डिवोशनल Chants बनाए हैं जिसका मधुर संगीत भी उन्होंने खुद बनाया है।

इसके साथ ही उन्होंने हाल ही में अपने बेटे के साथ मिलकर औरतों के सशक्तिकरण की यात्रा पर एक शॉर्ट फिल्म ” नारी” का निर्माण भी किया है। इतना ही नहीं वे जल्द ही एक किताब लेकर भी आ रही हैं जिसमें वो अपने जिंदगी के अनुभवों को सांझा करेंगी।

डॉक्टर रीटा दत्त बाकी सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा हैं। उनका मानना है कि चाहे आप कोई भी काम करें लेकिन वह काम कभी नहीं छोड़ना चाहिए जिसे आपका मन प्रसन्न होता है। चाहे आप अपने पैशन को फुल-टाइम प्रोफेशन न बनाएं लेकिन उसे किसी न किसी तरीके से जारी रखना चाहिए।

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