चंडीगढ़

3 जनवरी 2017

दिव्या आज़ाद
नौ जनवरी को शहर को 25 वां मेयर मिलेगा, लेकिन इस बार भाजपा के सामने कांग्रेस की बजाय अपनों से निपटने की चुनौती है। दरअसल, वर्तमान मेयर बगावत पर उतर आईं हैं। आशा जसवाल ने मेयर पर और रविकांत शर्मा ने सीनियर डिप्टी मेयर पर के लिए नामांकन भरा है। यहां बता दें कि दोनों ने भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन भरा है।
इस मौके पर मेयर आशा जसवाल ने कहा कि पार्टी को जोड़कर रखने वाले ही गुटबाज़ी करवा रहे हैं। उन्होने कहा कि पार्षदों का फैसला प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन को नहीं दिखाया गया। वहीं भाजपा की तरफ से मेयर पद के लिए देवेश मोदगिल नगर निगम कार्यालय नामांकन भरने पहुंचे। सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए गुरप्रीत ढिल्लों और डिप्टी मेयर पद के लिए विनोद अग्रवाल ने नामांकन भरा है।


भाजपा को सताने लगा 2001 का इतिहास दोहराने का डर 2001 में भाजपा की ओर से क्रॉस वोटिंग के कारण ही कांग्रेस ने महज तीन पार्षद होते हुए भी मेयर की कुर्सी पर कब्जा कर लिया था। इसीलिए इस बार के चुनाव में भी पार्टी का पहला टारगेट क्रॉस वोटिंग रोकना होगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी का उम्मीदवार तय होने के बाद अलग-अलग धड़ों से जुड़े वोटर दल की मर्जी के विपरीत क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं।
उधर, कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि उनके वोटरों की संख्या 4 है। यदि गिनती में उनका वोट 8 से 10 भी पहुंच जाता है, तो भी उनकी जीत होगी, क्योंकि इससे भाजपा पार्षदों की तरफ से क्रॉस वोटिंग सामने आ जाएगी। साल 2016 में भी भाजपा पार्षदों ने मेयर पद के चुनाव में क्रॉस वोटिंग की थी। उस समय कांग्रेस के वोटरों की संख्या आठ थी, लेकिन उनके उम्मीदवार मुकेश बस्सी को 15 मत पड़े। वहीं पिछले साल भी जब वित्त एवं अनुबंध कमेटी का चुनाव हुआ, तो क्रॉस वोटिंग के कारण भाजपा की उम्मीदवार हीरा नेगी हार गई थीं। वहीं कांग्रेस के देवेंद्र सिंह बबला ने जीत दर्ज की थी।

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