तीन दिवसीय कत्थक फैस्टिवल के पहले दिन गुरू डाॅ.शोभा कौसर एवं डाॅ.समीरा कौसर के कत्थक की धूम

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चंडीगढ़
22 मार्च 2018
दिव्या आज़ाद 
चंडीगढ़ नाॅर्थ जोन कल्चरल सेंटर ;पटियाला  और संगीत नाटक अकादमी के सौजन्य से आज यहां चंडीगढ़ के बाल भवन स्थित नवरंग सभागार में तीन दिवसीय कत्थक फैस्टिवल का आगाज हुआ। जिसमें र्छब्ब् के निदेशक प्रोफैसर सौभाग्यवर्धन बादल एवं संगीत नाटक अकादमी के चैयरमैन श्री कमल अरोड़ा उपस्थित थे। आज के मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती नलिनी सिंघल निदेशक आईसीसीआर ने शिरकत की। कार्यक्रम के पहले दिन कत्थक के सुप्रसिद्ध गुरू एवं कत्थक नृत्यांगना गुरू शोभा कौसर एवं उनकी शिष्या डाॅ.समीरा कौसर ने जयपुर घराने के कत्थक नृत्य की प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही बटोरी।
जब कोई कलाकार सम्पूर्ण भाव से स्वयं को कला में आत्मसात् करके कला की चरम सीमा को छू ले तो कला प्रेमियों के लिए ऐसा कलाकार पूज्नीय होकर गुरू का दर्जा हासिल कर लेता है और यह बात अन्तराष्टर््ीय ख्याति प्राप्त जयपूर घराने की कत्थक नृत्यांगना श्रीमती शोभा कौसर पर पूर्णतः लागू होती है। आज ये देष की एकमात्र कत्थक नृत्यांगना है जो कि कत्थक के जयपुर घराना का शुद्ध परंपरानुसार प्रस्तुतिकरण कर रही है। कत्थक नृत्य में निपुण शोभा कौसर ने कत्थक की विधिवत षिक्षा महान गुरू नारायण प्रसाद के षिष्य पंडित कन्हैया लाल के षिष्यत्व में ग्रहण कीं, उपरान्त गुरू कुंदन लाल गंगानी से इन्होने कत्थक के विभिन्न परम्पराओं व गहराइयों को सूक्ष्मता से जाना और उसमें प्रवीणता प्राप्त की। कत्थक के अतिरिक्त ये भारत के विभिन्न लोक नृत्य में भी महारथ प्राप्त है। यही नहीं मधुर आवाज की धनी शोभा कौसर विभिन्न भाषाओं में गायन गाने में भी निपुण है। डाॅ. षोभा कौसर एक ऐसे व्यक्तित्व की धनी है जो कि सदैव कला व इनसे जुडे विभिन्न पहलुओं की खोज कर निरन्तर कला के विकास में जुटी रहती हैं। इन्होने कत्थक नृत्य को भी परम्परानुसार इसके दायरे को बढावा देते हुए नृत्य में सौम्यता व नवीनता का विकास किया। शोभा कौसर नाम मात्र एक नृत्यांगना का नहीं है बल्कि यह नाम है कत्थक नृत्य को नई पहचान एवं प्रसिद्धि दिलवाने वाली शख्सियत का जिन्होने कत्थक नृत्य को विश्व भर में प्रसिद्धि दिलवायी।
डासमीरा कौसर सुंदर भावए दमदार नृत्य एवं भावपूर्ण प्रस्तुति का सुंदर मिश्रण है डासमीरा जयपुर घराने की प्रसिद्ध एवं युवा नृत्यांगनाओं की श्रेणी में अपना वर्चस्व स्थापित कर चुकी है प् कथक नृत्य में निपुण समीरा ने कथक की शिक्षा गुरु कैन्हया लाल जी से प्राप्त कीए उपरंत जयपुर घराने की महान कथक गुरु डाण् शोभा कौसर से इन्होने कथक की विभिन्न परम्पराओं एवं गहराइयों की सूक्ष्मता से प्रवीणता प्राप्त की प् कथक नृत्य में भाव एवं तकनीकी पक्ष पर मजबूत पकड़ दोनों के कारण समीरा ने अपने लिए कला जगत में अपना सम्मानजनक स्थान बनाया है प् डाण् समीरा का नृत्य में परम्परा अनुसार प्रस्तुतिकरण दर्शकों को शुद्ध शास्त्रीय का आभास करवा जाता है नृत्य के भाव पक्ष एवं तकनीकी पक्ष पर इनकी मजबूत पकड़ होने के कारण प्रस्तुतिकरण प्रसंशनीय है इनके नृत्य में प्रेमए क्रोध ए श्रृंगारए करुणा इत्यादि  विशेष स्थान रखते हैं
अपने कार्यक्रम की शुरूआत इन्होंने भक्तिमयी प्रस्तुति दुर्गा स्तुति से की ‘‘जै भगवती देवी नमो वर दे’ बंदिश से सजी इस प्रस्तुति से इस जोड़ी ने दर्शकों को सहज ही अपने साथ बांध लिया। उपरांत डाॅ. समीरा कौसर द्वारा शुद्ध कत्थक नृत्य की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए गुरू शोभा कौसर ने भी शुद्ध कत्थक नृत्य प्रस्तुति किया। इन्होंने तोड़े,टुकड़े,परन,गत इत्यादि का अद्भुत प्रदर्शन किया। इसके पश्चात भाव पक्ष पर आधारित कालिंदी नृत्य कलाकृति का प्रदर्शन किया। जो दर्शाती है यमुना और भगवान श्री कृष्ण की अद्भुत मैत्री ऐसी मैत्री जो बनी रही तब भी जब कृष्ण के अन्य समस्त सम्बन्ध काल एवं परिस्थितियों में विलीन हो गए परन्तु यमुना-कृष्ण की परम सखी सहयात्री और सहचारिणी, आजीवन कृष्ण के चारो ओर शीतलता से बहती रही। और हर कदम पर उनका यशगान करती रही।
कार्यक्रम का समापन एक ठुमरी से किया गया। ‘ठाढो जी बिहारी नारी देख सगरी’ जिसे गुरू शोभा कौसर ने  प्रस्तुत करके खूब तालियां बटोरी।
इनके साथ हारमोनियम पर पं. ज्वाला प्रसाद,सितार पर विजय षर्मा, तबले पर श्री फतेह सिंह गंगानी एवं महमूद खां तथा बांसुरी पर प्रकाष ने बखूबी संगत की।

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