द डर्टी गेम ऑफ पीआर

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बताने की आवश्यकता नहीं है कि चंडीगढ़ शहर में पीआर प्रोफेशन का क्या हाल चल रहा है। मीडिया में चुनिंदा कांटेक्ट होने से कुछ व्यक्ति अपने आप को पीआर बताने लगते हैं जिसके कारण इस प्रोफेशन की बेकद्री की जा रही है। लेकिन आज हम बात करेंगे चंडीगढ़ के बड़े-बड़े पीआर कंपनियों को चलाने वाले या उनमें काम करने वाले कुछ बड़े खिलाड़ियों की। कुछ लोग पीआर की बेकद्री करने वाले दूसरे लोगों को देख कर अपना प्रोफेशनलिज्म भी भूलते जा रहे हैं।

आज बात करेंगे कुछ चुनिंदा पीआर के बदलते रवैया के बारे में:

द जेलस वन

यह पीआर एक जमाने में बहुत बड़ी पीआर कंपनी के लिए काम करते थे। उसके बाद इन्होंने अपना खुद का काम शुरू कर लिया। इनको जेलस वन का नाम इसलिए दिया है क्योंकि यह दूसरे पीआर से जलते हैं। किसी और को काम मिलता देख इनको बर्दाश्त नहीं होता और यह उसके खिलाफ अफवाहें फैलाने में लग जाते हैं। इतना ही नहीं इनको तो कई जर्नलिस्टों से भी तकलीफ होती है। इनको जब तक काम होता है यह उनके साथ मीठे बनते हैं और काम खत्म होते ही यह जर्नलिस्टों के बारे में गलत-गलत बोलना शुरू कर देते हैं। इसके साथ ही यदि ये किसी और पीआर के साथ मिलकर कोई काम करें तो ये जर्नलिस्टों के साथ अपनी खुंदक वहां भी दिखाते हैं। ये उस पीआर की आड़ में जर्नलिस्ट की बेइज़्ज़ती कर उनको बुरा बना देते हैं। शायद ये भूल गए हैं कि यह रियल लाइफ है, यहां खेल से कोई कभी सफल नहीं हुआ है। इनको अपनी ईर्ष्या और बचपना छोड़ काम पर ध्यान देना चाहिए।

ओवर स्मार्ट वन

यह बहुत ही मशहूर पीआर हैं। हर कोई इनको जनता है। कई लोग इनके काम की बड़ी तारीफ भी करते हैं। ये अपने काम में अच्छे भी बहुत हैं। लेकिन इनकी ओवर-स्मार्ट बनने की आदत ने इनके काम और मीडिया रिलेशन्स पर काफी असर डाला है। ये हर किसी से प्यार से बात करते हैं। लेकिन इनकी पिक एंड चूज़ करने की आदत के कारण कई जर्नलिस्ट इनसे खफा हैं। ये आपको केवल उन इवेंट में बुलाएंगे जहां इनको भीड़ दिखानी हो। लेकिन जैसे ही कोई बड़ा इवेंट हुआ या कोई मशहूर हस्ती आई तो ये आपको एक दम भूल जाएंगे। हां लेकिन ये आपको प्रेस नोट जारी करना नहीं भूलेंगे। इनकी इस आदत के कारण इनकी खबरें लगनी कम हो गई थी इसलिए इन्होंने एक नया तरीका अपनाया। इन्होंने अलग अलग नाम की ईमेल आईडी बनाई जिनसे ऐसे प्रेस नोट आसानी से लग जाएं जहां सभी मीडिया वालों को इन्विटेशन नहीं भेजा था। लेकिन ये शायद इस बात से अनजान हैं कि मीडिया वाले उड़ती चिड़िया के पर भी गिन लेते हैं तो क्या उनको यह नहीं मालूम होगा कि किस ईमेल से कौन प्रेस नोट जारी करता है! वाह रे ओवर-स्मार्टनेस!!!

द सेल्फिश वन

हमने इनको सेल्फिश नाम इसलिए दिया क्योंकि यह अपने मतलब के लिए मीडिया कर्मियों का इस्तेमाल करना अच्छे से जानते हैं। अपने इवेंट में भीड़ दिखाने के लिए यह जर्नलिस्टों को बड़े प्यार से कई बार फोन करके बुलाते हैं। यहां तक कि ऐसे जर्नलिस्टों को जिनका फील्ड में आना जाना न के बराबर है। कई सालों से एक बड़ी पीआर फॉर्म चला रहे यह पीआर जर्नलिस्टों को इज्जत देना एकदम भूल गए हैं। इवेंट में बुलाने के बाद यह मीडिया कर्मियों से कहते हैं कि आप तो केवल खाना खाने ही आए थे और चुपचाप से अपने मनमर्जी के जर्नलिस्टों को गिफ्ट थमा देते हैं। न तो कोई मीडिया कर्मी इनका खाना खाने या गिफ्ट लेने के लिए बेकरार है, लेकिन यह एक बात भूल गए कि यदि आपने किसी को अपने इवेंट में खुद बुलाया है तो उनको सभी के समान इज्जत दी जानी चाहिए। एक बार क्लाइंट को भीड़ दिखाने के बाद यह मीडिया कर्मियों को खाना खाकर निकलने के लिए कह देते हैं। फिर जब गिफ्ट को लेकर बवाल होता है और खबर नहीं लगती तो यह अगले दिन मीडिया कर्मियों को फोन कर माफियां मांगने लगते हैं। यदि यह सभी से एक समान व्यवहार करने लगें और उनको केवल भीड़ के तौर पर इस्तेमाल न करें तो यह नौबत ही ना आए।

हमारा मकसद किसी भी पीआर को बुरा कहना या नीचा दिखाना नहीं है लेकिन जब पीआर अपना प्रोफेशन भूलकर गलत हरकतें करके मीडिया कर्मियों की बेइज्जती करने पर उतारू हो जाए तो उन्हें आईना दिखाना आवश्यक है।

पीआर और जर्नलिस्टों का एक गहरा संबंध होता है। दोनों को ही एक दूसरे की आवश्यकता है। ऐसे में यदि बड़े-बड़े पीआर ही ऐसे काम करेंगे, तो इस प्रोफेशन का स्तर इतना गिर जाएगा कि शायद कभी ठीक ही ना हो सके। काम को प्रोफेशनल तरीके से ही किया जाना चाहिए और उसमें पर्सनल मतलब या दूसरों को देख कर गलत तरीके से आगे बढ़ना नहीं होना चाहिए।

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