चंडीगढ़
25 फरवरी 2017
दिव्या आज़ाद
ट्रिनिटी एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन ने खेलों के दौरान लगने वाली चोटों से सुरक्षा एवं बचाव पर एक सिम्पोजिया और पैनल परिचर्चा आयोजित की। इस कार्यक्रमा का थीम ‘‘ स्पोट्र्स इंजरी प्रिवेंशन, ए मल्टीडिस्पलनरी एप्रोच’’ था।
इस दौरान अलग अलग सत्रों में व्याख्यान, सिम्पोजियम और पैनल परिचर्चा आयोजित की गई। अलग अलग क्षेत्रों से संबंधित प्रवक्ताओं ने खेलों में चोट से सुरक्षा के संबंध में विभिन्न पहलुओं के बारे में उपयोगी जानकारी दी। कार्यक्रम में ट्राईसिटी के जाने माने कोच, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी, विभिन्न खेलों में उभरते खिलाडिय़ों के अभिभावक भी शामिल हुए। इस दौरान खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले पांच युवा खिलाडिय़ों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।
आयोजन में स्पोट्र्स इंजरीज अपडेट 2017 की मेजबानी ट्रिनिटी हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा की गई। इसका उद्घाटन जाने माने मेहमानों ने किया जिनमें पूर्व ओलंपियन विंग कमांडर (रिटायर्ड) सतीश भल्ला, जो कि यूटी खेल परिषद, चंडीगढ़ के एग्जीक्यूटिव सदस्य भी हैं, श्रीमति कंवल ठाकुर सिंह, महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड से सम्मानित पूर्व अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी , राजपाल सिंह, अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान शामिल हैं। इस मौके पर उपस्थित अन्य लोगों में श्री हरमीत काहलों, अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित, एशियन टुअर विनर, डायरेक्टर, मोहाली गोल्फ रेंज एवं चंडीगढ़ गोल्फ रेंज, श्री सुरिंदर सिंह बाईजी, पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी, सचिव, चंडीगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन (हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन से संबंद्ध) और चयनकर्ता, हरियाणा रणजी ट्रॉफी, डॉली दहिया, उपनिदेशक, शारीरिक शिक्षा विभाग, पंजाब यूनिवर्सिटी और मेजर (रिटायर्ड) दीपक चौधरी, अध्यक्ष, जिमनास्टिक एसोसिएशन ऑफ चंडीगढ़ भी शामिल हैं।
समारोह की शुरुआत में दीप प्रज्जवलित करने की रस्म के बाद एक एक्सक्लूसिव स्पोट्र्स इंजरीज हेल्थ लेटर का भी विमोचन किया गया। खेलों में अपने शानदार प्रदर्शन से योगदान देने वाले शहर के पांच युवा खिलाडिय़ों को भी सम्मानित किया गया। इन पांच खिलाडिय़ों में गोल्फर किरणदीप सिंह कोछड़, स्कवैश खिलाड़ी मास्टर इंद्रजीत सिंह, स्क्वैश खिलाड़ी जानिया सिंह, रेसलर प्रभपाल सिंह और रेसलर गुरप्रीत सिंह शामिल हैं।
डॉ.मोहिंदर कौशल, चेयरमैन, ऑर्थोपेडिक्स विभाग, चीफ कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स और यूनिट हैड, ऑर्थोस्कॉपी, स्पोट्र्स इंजरीज एवं एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी, ट्रिनिटी हॉस्पिटल द्वारा खेल के दौरान लगने वाली चोटों से जूझने वाले खिलाडिय़ों को ध्यान रखने के लिए महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर किसी अंग को चोट या कोई मुश्किल हो रही है तो उसे नजरअंदाज ना करें, बल्कि तुरंत डॉक्टर से सलाह करें। अपने अंदाज को ना बदलें, आप एक अलग अंदाज का स्ट्रोक विकसित कर सकते हैं या खेल सकते हैं क्योंकि आपका शरीर उसी में सुविधा महसूस करता है। उसमें बदलाव करने से किसी चोट या घाव का जोखिम बढ़ सकता है। कोच भी हो सकता है तकनीक को बदल दें लेकिन वे आपके खेलने के अंदाज को नहीं बदल सकते हैं। आपके लिए सिर्फ खेल खेलना शुरू करने से ही सब कुछ ठीक  नहीं होता है। आपका शरीर भी खेल की मांग के अनुसार तैयार होना चाहिए। यहीं पर एक्सरसाइज की जरूरत महसूस होती है। वहीं मानसिक तौर पर तैयारी भी जरूरी है क्योंकि अगर आप मानसिक तौर पर खेल पर केन्द्रित हैं तो भी कई सारी चोटों या घावों से बचा जा सकता है।
डॉ.एच.के.बाली, ट्राईसिटी के जाने माने कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा भी खिलाड़ी के दिल के बारे में बात की गई और उन्होंने बताया कि कोचों और खिलाडिय़ों को इस बारे में क्या जानने की जरूरत है? डॉ.अर्निबन मलिक, स्पोट्र्स फिजिशयन, स्पोट्र्स इंस्टीट्यूट, पटियाला और पूर्व टीम फिजिशयन, भारतीय हॉकी और बॉक्सिंग टीम ने भी खेलों में चोटों से सुरक्षा और डोपिंग के बारे में बात की। उन्होंने भारत में तेजी से उभर रहे स्पोट्र्स मेडिसन के बारे में भी बात की। उन्होंने इस बात की जरूरत को भी उभारा कि जिला और राज्य स्तर पर विभिन्न खेलों के ट्रैनिंग सेंटर पर स्पोट्र्स मेडिसन फिजिशयंस की जरूरत है और ये खिलाडिय़ों के लिए महत्वपूर्ण है।
डॉ.मुकुल कौशल, रजिस्ट्रार, स्पोट्र्स इंजरी सेंटर, सफदरजंग, नई दिल्ली द्वारा ऑर्थोस्कोपी पर बात की गई और उन्होंने खेलों में चोटों की भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने ऑर्थोस्कोपिक प्रक्रियाओं के साथ मरीजों की तेज रिकवरी और उनके तेजी से ठीक  होकर कुछ ही समय में खेलों में वापिसी के बेहतरीन परिणामों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि इससे खिलाडिय़ों को अपना कैरियर बचाने में भी मदद मिली है, जबकि इसके बिना उनके खेल जीवन का अचानक ही अंत हो जाता था। डॉ.मधुमिता भट्टाचार्य, एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ बॉटनी, चंडीगढ़ ने चमत्कारिक गुणों वाले प्राकृतिक सुपर भोजन और खेलों के बारे में बात की।
डॉ.गुरदीप सिंह कोछड़, पूर्व एडीशनल प्रोफेसर, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ द्वारा गोल्फ इंजरीज और इससे बचाव पर विचार दिए गए। डॉ.अमित भट्टाचार्य, स्पोट्र्स फिजियोलॉजिस्ट, पीजीआई, चंडीगढ़ और मेंटर एवं गाइड, ओलिंपियन अभिनभ ब्रिंदा, द्वारा भी सबकोशियंस माइंड की ताकत और खिलाड़ी के जीवन में इसकी उपयोगिता के बारे में बताया गया।
डॉ.रंजीत सिंह, ने खेलों में चोटों पर पैनल डिस्कशन का संचालन किया और खेलों में लगी चोटों के समय पर इलाज के महत्व को सामने रखा। पैनल में अलग अलग खेलों के कोच, खिलाड़ी और युवा खिलाडिय़ों के अभिभावक भी शामिल हैं। उनके साथ ही डॉक्टर्स, शिक्षाविद और खेल प्रशासन से जुड़ी अन्य हस्तियां भी इस परिचर्चा में शािमल हुईं। पूर्व ओलंपियन विंग कमांडर (रिटायर्ड) सतीश भल्ला, ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम, खिलाडिय़ों, ट्रैनर और युवा खिलाडिय़ों मां-बाप के लिए एक शानदार मंच हैं, जिस पर वे इस संबंध में खुलकर बातचीत कर सकते हैं।
कंवल ठाकुर सिंह, पूर्व अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने इस मौके पर कहा कि आज के खिलाडिय़ों की किस्मत अच्छी है कि उन्हें ऐसे समय में खेलने के मौके मिल रहे हैं जबकि खेलों में लगने वाली चोटों के बेहतर एवं आधुनिक इलाज उपलब्ध हैं। राजपाल सिंह, पूर्व कप्ताह, भारतीय हॉकी टीम ने इस मौके पर उपस्थित खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित किया कि वे किसी भी चोट को अपने पसंदीदा खेल में वापसी करने से रोकने का मौका ना दें। उन्होंने कहा कि आधुकिन इलाज और फिर से खेलने की इच्छाशक्ति एक खिलाड़ी को फिर से मैदान पर वापसी करने में मदद कर सकती है।
इस दौरान ट्राईसिटी से जाने माने कोच भी कार्यक्रम में उपस्थित थे जिनमें शशि एन. (जिमनास्टिक कोच), सुरिंदर महाजन (बैडमिंटन कोच) और राजीव तुली (बैडमिंटन कोच) भी शामिल हैं।

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