हिन्दी दिवस पर विशेष- सबका हो हिन्दी से नाता: मंजू मल्होत्रा फूल

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एक तो ऐसी भाषा हो जो, जन-जन के मन में बसती हो

सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर जोड़ने का काम जो करती हो

एकता का आधार बने वह, इक माला में पिरोेती हो
पूरे भारतवर्ष के राज्यों को सहजता से वह जोड़ती हो

संपर्क करें सब हिन्दी में और हिन्दी दिल से जुड़ी रहे
मेरी भारतमाता की ऐसे सीमाएं सुरक्षित बनी रहें

हृदय अपना विशाल करो तुम हिन्दी का सम्मान करो
एक प्रदेश न केवल बल्कि सर्वत्र ही तुम प्रयोग करो

थोड़ा गांव को आगे लाना, शहरों के है साथ चलाना
सभी राज्य दिल से अपनाएं, वर्तमान भविष्य सुदृढ़ हो जाएं

सीमाएं सारी मिटानी होंगी, जन -जन तक पहुंचाने होगी
देश की एकता अखंडता की खातिर, देश की उन्नति की भी खातिर

प्रांत शहर या गांव हो मेरा, बिन एका ना हुआ सवेरा
याद करो स्वतंत्रता संग्राम को, जनसंपर्क का माध्यम रही थी

कल्पना एकता कि तुम कैसे बिन भाषा कर सकते हो
विभिन्न धर्म संस्कृति और भाषाओं को एकजुट तब रख सकते हो

हिन्दी सबको अपनानी होगी, शक्ति भारत में भर जानी होगी
आदान-प्रदान विचारों का हो, राष्ट्रीय कार्य या आंदोलन का हो

शक्तिहीन नहीं करना हमको भारतवासी यह याद रखें
राष्ट्र एकता और अखंडता के लिए हिन्दी अनिवार्य प्रयोग करें

एक आधार सबका यह धरती माता, उस पर सबका हो हिन्दी से नाता
सबका हो हिन्दी से नाता, सबका हो हिन्दी से नाता

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