धूल में लिपटे नन्हे से बच्चे,
बे परवाह, बेखौफ से बच्चे।
जूता न चप्पल पांवों में इनके ,
पार्कों में नज़र आते ये बच्चे।
         माताएं इनकी काम पे जाएं,
         बच्चों को भी साथ ले जाएं।
         माता इनकी काम हैं करती,
         बच्चों को पार्कों में हैं रखती।
बच्चे सब झुंड में रहते,
आपस में खेलते रहते।
सभी शौच पार्क में करते,
मुफ्त खाद पार्क में भरते।
           स्कूलों में ना जाएं बच्चे,
           सारा दिन ये खाएं धक्के,
           लोगों से ये खाने को लेते,
           माताएँ देखें पर ना रोकें।
 मां बाप  इनके पढ़े जो होते,
बच्चे पार्कों में रुलते ना होते,
शहर में बच्चों का हाल हो ऐसा,
गांवों में उनका हाल होगा कैसा।
           फ्री शिक्षा देने के गुण गाएं नेता,
           मुद्दा सही समझ ना पाएँ नेता,
           मां बाप अगर शिक्षित हो जाएं,
           बच्चे इनके पढ़ने स्कूलों में जाएं।
बृज किशोर भाटिया,चंडीगढ़

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