सेक्टर 32 अस्पताल का बुरा हाल:  बेसहारा व असहाय मरीजों को देखने वाला कोई नहीं 

इलाज के आभाव मेँ जख्म में कीड़े पड़ने से बेहाल मरीजों की सुध लेने से भी इंकार किया डॉक्टरों ने

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चंडीगढ़

9 सितंबर 2018

दिव्या आज़ाद
सेक्टर 32 के अस्पताल जीएमसीएच में मरीज इलाज़ के लिए मारे-मारे भटक रहे हैं पर डॉक्टर्स को उनकी सुध लेने की फुर्सत ही नहीं है। ये कहना है चंडीगढ़ कॉंग्रेस महासचिव एस,एस. तिवारी ने जो वहां किसी निजी काम से गए थे। उन्होंने बताया कि अस्पताल की इमेरजैंसी के अंदर मे 2 मरीज़ एक महिला व एक पुरुष बेसहारा पड़े हुए हैं जिनके जख्मों मे कीडे पड़े हुए थे एवम जख्मों से बदबू भी आ रही थी।
तिवारी ने इमेरजैंसी के डॉक्टरों से उनका इलाज प्राथमिकता के आधार पर करने को कहा तो उन्होंने आनाकानी करते हुए कहा की यह मेरा केस नही है।
इस सम्बन्धित जब एस.एस तिवारी ने ईएमओ से बात की तो ईएमओ ने अपनी लाचारी बताते हुए कहा कि डॉक्टर उनकी भी नहीं सुनते। इस पर तिवारी ने उनसे आग्रह किया कि एक  बार चलके दोनो मरीजों के हालात तो देख लो जिस पर उन्होंने मरीजों को देखा परन्तु इलाज़ के लिए लाचारी जताई। बाद में तिवारी ने जब इस सम्बन्ध में अस्पताल के निदेशक  डॉक्टर चमन लाल से बात की गया तो उन्होंने कहा कि मैं अभी मरीजों की जाँच करवाता हूँ लेकिन उनका भी कोरा आश्वासन ही रहा। डॉक्टर चमन से शिकायत करने पर भी मरीजों की  कोई देखभाल नही हुई।
तिवारी ने आज यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि बेसहारा मरीजों के लिये सरकार करोड़ों का फंड हर साल देती है परन्तु फिर भी मरीज धक्के खाने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि ये फंड कहाँ जाता है व इसे किस प्रकार खर्च किया जाता है, इसकी उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिये। इसके अलावा जिन कर्मचारियों को बेसहारा मरीज़ की देख रेख के लिये लगाया गया है वह कहाँ पर ड्यूटी कर रहे हैं।
तिवारी ने चंडीगढ़ के प्रशासक बी.पी सिंह बद्नौर से आग्रह किया की जीएमसीएच, सेक्टर 32 का दौरा कर वहाँ के हालात का जायजा लें व बजट की भी जाँच करवाई जाए।
उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मरीजों की सही देखभाल नही हुई तो चंडीगढ़ कॉंग्रेस इसके खिलाफ़ संघर्ष करेगी।
इसके अलावा तिवारी ने कहा कि जीएमसीएच-32 मेँ गंदगी से बुरा हाल है। वहाँ सफाई सही से ना होने के कारण बदबू आती है। कोई भी डॉक्टर, नर्स एवम अन्य स्टाफ अपना नेम प्लेट लगाकर नही रखते जिस कारण मरीजों को भी काफ़ी दिक्कत आती है कि हमारा इलाज कौन डॉक्टर कर रहा है ।

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