मोदी 2.0: रिफॉर्म फॉर ट्रांसफ़ॉर्म

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चंडीगढ़

30 जून 2020

दिव्या आज़ाद

देखते ही देखते कोरोना चीन के लोकल से कब ग्लोबल हो गया इसका आभास जब तक दुनिया को होता देर हो चुकी थी। यह महामारी जंगल में आग की तरह फैली, जिसने मानवजाति के लिए की जाने वाली अधिकांश सामाजिक ,राजनैतिक और आर्थिक गतिविधियों को रोक दिया।पूरी दुनिया की तरह, भारत भी बंद हो गया और लोगों को घरों के अंदर रहने का निर्णय लेना पड़ा।इसके बावजूद, आने वाले हफ्तों में, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में 7 लोक कल्याण मार्ग पर अनेक बैठकें हुईं। 12 मई को, प्रधानमंत्री मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपए के आत्म निर्भर भारत पैकेज की घोषणा की, जिसमें तत्‍काल आर्थिक राहत और ढांचागत सुधार उपायों को शामिल किया गया।

मोदी द्वारा लाया गया कोई बड़ा सुधार हो या कोई देशहित में लिए गये कुछ कड़े निर्णय इस पर सवाल उठाने में कुछ लोगों ने कभी भी संकोच नहीं किया।कुछ लोगों ने सुधारों पर सवाल उठाए, लेकिन कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने यह समझा कि 2014 और 2019 में मोदी को मिला शानदार जनादेश बड़े सुधार करने और साहसिक राजनीतिक कदम उठाने के लिए था, जो इतिहास और समय की बाधाओं से परे था।

स्वयं की बजाय समूह का भाव होने पर ही जन कसौटी पर खरा उतरा जा सकता है। देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री नरेन्द्र मोदी ने राजसत्ता की परिभाषा ही बदल दी है। पारदर्शी नीति और जनहितकारी कार्यों से देश के जनमानस में राजनीतिक विश्वास का वातावरण निर्मित हो सका। 2019 की गर्मियों में लंबे चुनावी घमासान के पश्चात अपनी शानदार जीत के बाद, श्री मोदी ने कई मोर्चों पर सफलता हासिल की; धारा 370 और 35ए के निरस्त होने से भारत संघ के साथ जम्मू-कश्मीर तथा लेह और लद्दाख का पूर्ण एकीकरण हुआ। अयोध्या पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन ने इस आंदोलन और विश्वास से जुड़े लाखों लोगों को उत्साह से भर दिया। इसी तरह, लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों जैसे रक्षा स्टाफ प्रमुख की स्थापना, ट्रिपल तलाक अधिनियम के माध्यम से मुस्लिम महिलाओं का सशक्तीकरण, सीएए के माध्यम से धार्मिक उत्पीड़न से मुक्ति,बोडो समझौता और मिशन जल शक्ति की स्थापना द्वारा पेयजल का अधिकार प्रदान करने पर तेजी से कार्य किया गया। आर्थिक मोर्चे पर, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के समेकन और पुनर्पूंजीकरण, कॉर्पोरेट कर की दर में ऐतिहासिक कमी, कंपनी अधिनियम के तहत 14,000 अभियोगों को वापस लेने, फेसलेस आकलन, विवाद से विश्‍वास योजना और दिवाला दिवालियापन कोड के सुदृढ़ीकरण से व्‍यापक वित्तीय स्थिरता और पारदर्शिता मजबूती आई है। इस दिशा में आत्‍म निर्भर भारत आर्थिक राहत और सुधार गतिशीलता को बढ़ाते हैं।

सत्ता की दूसरी पारी के आरंभ में ही ऐसे कई बड़े निर्णय लिए गए जिससे देश के सामने स्पष्ट हो गया कि मोदी सरकार का यह कार्यकाल कैसा रहने वाला है। जबकि दुनिया ने उत्‍तरजीविता पर अपने उपायों को केंद्रित किया, मोदी के नेतृत्‍व में भारत ने पुनरुद्धार की दिशा की परिकल्पना भी की है। पीएम गरीब कल्याण पैकेज ने 80 करोड़ किसानों, महिलाओं, दिव्यांगजनों, विधवाओं, दैनिक ग्रामीणों और बुजुर्गों को तत्‍काल वित्तीय सहायता और 52000 करोड़ रुपए से अधिक का राशन (16 मई के आंकड़ों के अनुसार) प्रदान किया है। ऐसे समय में जब विकसित दुनिया जरूरतमंदों को तेजी से धन जुटाने और उसका अंतरण करने के लिए जूझ रही है; डीबीटी ने डिजिटल इंडिया के द्वारा जेएएम ट्रिनिटी द्वारा संचालित जन धन खातों को एक बटन के क्लिक से इस विशाल कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।

135 करोड़ आबादी का पेट भरने वाला अन्नदाता हमारी योजनाओं के केंद्र बिंदु में है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी सबका साथ,सबका विकास सबका विश्वास के मूलमंत्र से भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकल्पित हैं।अन्नदाता का आर्थिक सशक्तिकरण हमारी प्राथमिकता है और किसानों की आय दुगुनी हो,उन्हें उनकी फसलों का सही दाम मिले,उनका उत्पादन बढ़े और भारत की कृषि निर्यात शक्ति में बढ़ोत्तरी हो इसके लिए चरणबद्ध तरीक़े से नीतियों का क्रियान्वयन हो रहा है।किसानों को एपीएमसी और आवश्यक वस्तु अधिनियम के चंगुल से मुक्त कराना; उन्हें अपनी उपज का उचित मुआवजा दिलाना तथा अपने उत्‍पाद को बेरोकटोक अंतर-राज्य ले जाने की अनुमति प्रदान करना एक ऐतिहासिक शुरूआत है।गोदाम, शीत भंडारण और कृषि-खाद्य प्रोसेसिंग की आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए के कृषि अवसंरचना कोष से खेत को बाजार से जोड़ने के साथ-साथ फसल की कटाई उपरांत प्रबंधन में मजबूती आएगी। इसके साथ-साथ, नकदी में कमी के अन्‍य सहायता उपायों के अतिरिक्‍त, किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से 2.5 करोड़ किसानों को रियायती दरों पर 2 करोड़ रुपए का ऋण उपलब्‍ध होगा जो श्री मोदी के वित्तीय समावेशन और प्रतिगामी सिद्धांत के अनुरूप है।

मनरेगा के तहत 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक के ऐतिहासिक आवंटन का उद्देश्य ग्रामीण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मजबूत करना, 300 करोड़ व्यक्ति कार्य दिवस कउ सृजन करना और प्रवासियों की जाँच करना है। ‘आधारभूत ढांचा, जो भारत की पहचान बन गया है’ का सृजन करने पर ध्यान केंद्रित करना, 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री द्वारा घोषित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर 1 ट्रिलियन रुपए खर्च करने के उनके दृष्टिकोण का हिस्सा है। हवाई अड्डे, राजमार्ग, जलमार्ग, रेलवे और बंदरगाह, हमारे आर्थिक विकास को गति देंगे और आगे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ हमें एकीकृत करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहला लोकसभा चुनाव जीतने के बाद संसद भवन के केंद्रीय कक्ष के संबोधन में 20 मई, 2014 को ही साफ कर दिया कि उनकी सरकार गरीब-गुरबों के कल्याण के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा था “सरकार वह हो जो गरीबों के लिए सोचे, सरकार गरीबों को सुने, गरीबों के लिए जिए, इसलिए नई सरकार देश के गरीबों को समर्पित है।यह सरकार गरीब, शोषित, वंचितों के लिए है। उनकी आशाएं पूरी हो, यही हमारा प्रयास रहेगा” और पिछले 6 वर्षों में हमने यह करके दिखाया है।इस आपदा की स्थिति में भी अगर बात प्रवासी मजदूर और शहरी गरीब लोगों की करें तो मोदी सरकार उनकी परेशानियों को लेकर काफी संवेदनशील है। हम श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए, श्रम सुधार हमारे कार्यबल को पुन: कौशल, रोजगार ग्रेच्युटी, वार्षिक स्वास्थ्य जांच, व्यावसायिक सुरक्षा और व्यावसायिक नियुक्तियां प्रदान करेंगे। इन्‍हें मोदी के सामाजिक कल्याण के विस्तार के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसमें उन्होंने पहले से 100% ग्रामीण विद्युतीकरण और स्वच्छता सुनिश्चित की है, उज्जवला के तहत खाना पकाने के सिलेंडर प्रदान किए हैं, पीएम आवास योजना के तहत किफायती आवास, आयुष्मान भारत के तहत समाज के वांछित वर्गों के लिए अनेक स्वास्थ्य बीमा योजनाएं प्रारंभ की हैं।

100% सरकारी गारंटी प्रदान करना, 3 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्‍त ऋण प्रदान करने, सरकारी अनुबंधों में 200 करोड़ रुपए तक की वैश्विक निविदाओं को स्‍वीकृति न देने, तथा एमएसएमई की परिभाषा को संशोधित करने से रोजगार सृजन की दिशा में व्यवसायों पर इसका कई गुना प्रभाव पड़ेगा, जिससे स्थानीय उद्योग का पोषण और घरेलू उत्पादन क्षमताओं का विस्‍तार होगा।

रक्षा उत्पादन में एफडीआई सीमा को 74% तक बढ़ाने से निजी कंपनियों को कोयला और खनन में खुले बाजार में प्रवेश करने की अनुमति मिलेगी, अंतरिक्ष अन्वेषण में उद्यमियों को प्रोत्साहित मिलेगा और रणनीतिक क्षेत्रों से लेकर निजी उद्यम सहित सभी क्षेत्रों को खोलने से नवोन्‍मेष को बढ़ावा मिलेगा, जिससे विकास और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

कंपनी अधिनियम में 40 प्रावधानों का उन्मूलन करने, दिवालियापन कार्यवाही शुरू करने के लिए न्यूनतम सीमा को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए करने, सचिवों के अधिकारिता समूह (ईजीओएस) के माध्यम से निवेश को तेजी से मंजूरी देने, मंत्रिस्तरीय परियोजना विकास सेलों का उद्देश्‍य व्यवसाय करने में आसानी प्रदान करना है।

आत्मनिर्भर भारत नारा नहीं विजन है।यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दिखाया गया एक ऐसा मार्ग है जिसपर चलकर भारत आर्थिक महाशक्ति बनेगा।आत्म निर्भर भारत का मंत्र भारत को आत्मनिर्भर बनाना है जो अपनी शर्तों पर दुनिया के साथ जुड़ता है, न कि अंतर्मुखी, आत्म केंद्रित राष्ट्र के रूप में। पिछले दो हफ्तों में हमने दो दशकों से अधिक के सुधार किए हैं। एक राष्ट्र के रूप में हमने कोविड19 की प्रतिकूल स्थिति को एक अवसर के रूप में बदल दिया है, और अज्ञात क्षेत्रों में कदम रखा है। इसका एक उदाहरण यह है कि भारत पहले पीपीई किट और मास्क का आयात करता था जबकि अब हम प्रत्‍येक का प्रतिदिन 5 लाख का उत्पादन करते हैं, जो निर्यात के लिए तैयार है।

हमारे देश व नागरिकों में असीम क्षमतायें हैं ज़रूरत बस उन्हें सही तरीक़े से सही दिशा में आगे ले जाने की है।आत्मनिर्भर भारत से हमारा मतलब अपने निर्यात को घटाना और आयात को बढ़ाना है और मोदी जी के नेतृत्व में चरणबद्ध तरीक़े से हम इस दिशा में आगे बढ़ेंगे ।अब जबकि भारत दुनिया से प्रतिस्‍पर्धा करने के लिए तैयार है, हम अपने घरेलू उत्‍पादन को बढ़ावा देंगे, हमारे औद्योगिक आधार के आकार और पैमाने का विस्‍तार देंगे और वैश्‍विक गुणवत्‍ता मानकों के अनुरूप निर्यात आधारित क्षेत्रों पर ध्‍यान केन्‍द्रित करेंगे। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था इन 6 वर्षों में स्‍थापित किए गए आधार पर कोविड19 की विपरीत परिस्‍थितियों का सामना करेगी और इसने ‘अप्रत्‍याशित बढ़ोत्‍तरी के लिए जमीन तैयार की है, न कि वृद्धिशील परिवर्तन के लिए।

मोदी के नेतृत्‍व में, सतत, ढांचागत सुधार, समयबद्ध कार्यान्‍वयन, निजी क्षेत्र की भागीदारी और उपेक्षित वर्गों के वास्‍तविक सशक्‍तिकरण ने सत्‍ता नियंत्रित, समाजवादी हथकंडों, लाइसेंस राज और सरकारी अपारदर्शिता के नेहरू युग का अंत कर दिया है। एक अरब लोगों के जनादेश से सुधारों के एक नए युग का सूत्रपात हुआ है।

भारतीयों और इंडिया इंक के लिए इस मौके का लाभ उठाने और एक प्रमुख आर्थिक शक्‍ति के रूप में उभरने का अवसर है; एक ऐसा राष्‍ट्र जो विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था को गति प्रदान करता है। वर्तमान समय व्‍यवसाय के अनुकूल नहीं है फिर भी भारत में व्‍यवसाय के लिए अच्‍छे अवसर हैं।निश्चित तौर पर यह हम सब के लिए कठिन समय है और हमें पूरे धैर्य के साथ कोरोना के साथ जंग लड़कर उसे हराकर भारत को विजयी बनाना है।लेकिन एक बात साफ़ है प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने आपदा को अवसर की तरह लेने की जो सकारात्मक राह दिखाई है वही भारत को आने वाले समय में विश्वगुरु बनाएगी।यह आपदा एक अवसर है हमें आत्मनिर्भर होने के लिए,स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए,आयात बढ़ाने के लिए,निर्यात घटाने के लिए,उत्पादन बढ़ाने के लिए,नए खोज नए नए अविष्कार नए आयाम गढ़ने के लिए।

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