गाय का धार्मिक, आर्थिक व वैज्ञानिक महत्व: स्वामी गोपाल मणि महाराज

0
509

चण्डीगढ़

31 अक्टूबर 2022

दिव्या आज़ाद

भारतीय संस्कृति की मूलाधार गौमाता की समस्त वेद पुराणों व शास्त्रों में अनंत महिमा गाई गई है। अथर्ववेद में कहा गया है, ‘पशवो न गावः, गावो विश्वश्य मातरः’ अर्थात् गाय पशु नही है, गाय विश्व की माता है। ये बात दिव्य धेनुमानस सदग्रंथ के रचयिता व भारतीय गौ क्रांति मंच, दिल्ली के संस्थापक गौऋषि गोपाल मणि महाराज ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कहे। अथर्ववेद के उपरोक्त सूत्र की अवधारणा को भारतीय जनमानस के ह्रदय पटल पर पुनः स्थापित करने के लिए हिमालय के संत गोपाल मणि  महाराज वर्ष 2008 से गौमाता राष्ट्रमाता महाभियान के माध्यम से  जनजागरण कर गाय को राष्ट्रमाता घोषित किए जाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि कल एक नवम्बर को गोपाष्टमी के अवसर पर गोपाल गोलोक धाम, कैम्बाला स्थित गौशाला में देश भर से जुट रहे गौभक्तों की मौजूदगी में भारत सरकार को अल्टीमेटम दिया जाएगा कि आगामी 20 नवम्बर 2023 के दिन पड़ रही गोपाष्टमी से पूर्व गौमाता को इस देश के अन्दर राष्ट्रमाता का संवेधानिक सम्मान दे अन्यथा 2023 की गोपाष्टमी के दिन दिल्ली में लाखों सनातनी गौभक्त एकत्रित होगे व मांग पूरी होने तक धरना प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 1 नवम्बर 2022 को चण्डीगढ़ में होने वाला गौमाता-राष्ट्रमाता महासम्मेलन एक संकेत मात्र है। संत ने बताया कि उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश की विधानसभाओं द्वारा गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर केंद्र सरकार को भेज कर एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया जा चूका है। वे अन्य राज्यों की विधानसभाओं से भी इसी प्रकार के प्रस्ताव पारित करवाने हेतु प्रयास कर रहें हैं।

इस अवसर पर गोपाल गोलोक धाम, कैम्बाला से आचार्य राकेश सेमवाल, प्रवक्ता गिरवर शर्मा, श्रीमती रत्नो देवी, प्रधान  नन्द कुमार, सुभाष शर्मा, ओमपाल शर्मा, शिव कुमार शर्मा, जयबीर मित्तल, पीपी वलादी, हेमचंद्र कश्यप, धर्मपाल शर्मा, परमजीत कौर, सुरेन्द्र जोशी, कृष्ण कुमार शर्मा व श्रीमती रीटा भनोट आदि भी उपस्थित थे।  


उन्होंने गाय के महत्व का बखान करते हुए कहा कि गौवंश भारत की आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक एवम सांस्कृतिक धरोहर है। गाय का गोबर ईंधन, बायोगैस, जैविक खाद, डीजल-पेट्रोल के विकल्प के रूप में उपयुक्त माना जाता है,गोमूत्र का उपयोग फिनायल एवं कीटनाशक दवाई बनाने में किया जाता है व गाय के दूध से दही, घी, छाछ, पनीर, मक्खन, मावा, मिठाईयां बनाई जाती है। गाय सनातन धर्म में आस्था का प्रतीक है। इस प्रकार मानव जीवन में गाय का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। मुनि जी ने बताया कि गाय से देश-प्रदेश के करोड़ों लोगों की जन भावनाएं जुड़ी है। 


उल्लेखनीय है कि पूज्य गोपाल मणि जी महाराज के सानिध्य में भारतवर्ष के समस्त सनातनी गौ भक्तों के द्वारा दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में तीन बार वर्ष 2014, वर्ष 2016 व वर्ष 2018 में गौमाता को राष्ट्रमाता के पद पर प्रतिष्ठा दिलवाने हेतु लाखों गौ भक्तों ने एकत्र होकर विशाल रैलियों के माध्यम से राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को ज्ञापन दिया। पुनः देश के समस्त राज्यों की राजधानियों में रैलियों के माध्यम से राज्यपालों व मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन सौंपे गए। फिर भी सरकार ने सनातनी हिंदुओं की आस्था पर ध्यान केंद्रित नहीं किया। पुनः गोपाल मणि जी महाराज के सानिध्य में 2016 में ही दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर 18 दिन का अनशन कर संसद में कूच किया गया। इसके साथ ही देश के 676 जिलों में जनजागरण  रैलियां कर समस्त जनमानस को जागृत करते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्र सरकार को गौमाता की राष्ट्रमाता के तौर पर प्रतिष्ठा प्रदान करने का ज्ञापन भेजा गया।  इसके बाद से पूज्य महाराज अन्य राज्यों तथा केंद्र सरकार से लगातार गौमाता को राष्ट्रमाता का संवेधानिक सम्मान की मांग कर रहे हैं।

इसी क्रम में पूज्य गोपाल महाराज के नेतृत्व में भारतीय गौ क्रांति मंच के प्रतिनिधिमंडल द्वारा नई दिल्ली में राष्ट्रीय नेताओं एवं कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की गई। देश के कई सांसदों ने अपनी और से इस भगीरथ प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की और कहा कि गौमाता को राष्ट्रमाता की प्रतिष्ठा मिलनी ही चाहिए। पूज्य महाराज श्री का कहना है कि जितना गौमाता का धार्मिक महत्व है, उतना ही वैज्ञानिक महत्व है। आयुर्वेद में कोई भी औषधि बिना गौमूत्र से सोधन किए बिना नही बनती है इसलिए सरकार गौ की महिमा को समझे।   

LEAVE A REPLY

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.