चंडीगढ़
29 अक्टूबर 2017
दिव्या आज़ाद
आर्य समाज सेक्टर 7 – बी का वार्षिक उत्सव आज धूमधाम से संपन्न हो गया है। कार्यक्रम के दौरान प्रवचन देते हुए पंजाब विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर विक्रम विवेकी ने कहा कि परमात्मा की भक्ति चिंताओं से मुक्त होकर ही की जा सकती है। इसके लिए  चिंता से विमुख होना पड़ेगा।  यह केवल चिंतन करने से ही हो सकती है। उन्होंने कहा कि मन ही व्यक्ति को चिंता की ओर ले जाता है।  इस के साथ दौड़ नहीं लगानी चाहिए।  यदि बुद्धि से सोचने लगते हो तो चिंतन होने लगता है।  यही चिंतन परमात्मा की ओर ले जाता है।  महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने लोगों को चिंताओं से दूर करके चिंतन करके आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर किया। हमारा ध्यान अच्छाई की ओर जाना चाहिए।  यही सात्विक गुणों का प्रतीक है।
आचार्य ज्योत्स्ना ने कहा कि  समाज में पतन का कारण खुद को बदलना नहीं है।  व्यक्ति अंतर्मुखी न होने के कारण अंदर से खोखला होता जा रहा है।  परमात्मा पदार्थ का उपयोग नहीं करता।  उसके द्वारा रचित पदार्थ मनुष्य के उपयोग के लिए है। आत्मा,  इंद्रियां,  मन जिससे प्रसन्न रहें वही स्वस्थ है।  संस्कार का अर्थ सुगंध देना है।  नैतिकता का पहला गुण सहायता है।  माता- पिता तथा गुरुजनों का सहयोग  करना चाहिए। जो बच्चा ऐसा करता है वह कभी  हिंसा नहीं कर  करेगा।  प्रेम की बात होगी तो अहिंसा और दया आएगी।
 उत्तरकाशी से पधारे स्वामी वेदानंद सरस्वती ने कहा कि हर व्यक्ति के पास सही और गलत पर विचार करने का विवेक नहीं होता है।  हमें अपनी बुराइयों पर ध्यान देना चाहिए।  चोरी,  हिंसा,  व्याभिचार, मद्यपान, मांस का सेवन करने से शारीरिक रोग उत्पन्न होते हैं। वाणी का दोष तो झूठ बोलना,  निंदा करना,  अनावश्यक बोलना और कड़वा बोलने  से आती है। बुराई निकलने से व्यक्ति  देवत्व  को प्राप्त होता है। नकल केवल ज्ञानी लोगों की ही करनी चाहिए। कार्यक्रम से पूर्व राजेश वर्मा ने भी अपने मनमोहक भजनों की प्रस्तुति से लोगों को आत्मविभोर कर दिया। इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।

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