इंडियन मार्किट पर अमरीका की लड़ाई- अगम बैरी

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चंडीगढ़

10 मई 2018

दिव्या आज़ाद

अमेरिकी ई-कॉमर्स  मार्किट एक बेहद सक्सेसफुल  मार्किट है. इन्होने इस साल ई-कॉमर्स में 500 बिलियन डॉलर की सेल्स की है, जिसे अब तक केवल चीन ही पछाड़ पाया है, जिसने इस साल 600 बिलियन डॉलर की सेल की. इसलिए, बहुत सी अमेरिकी कॉर्पोरेशन, दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले मार्केट, इंडियन ग्लोबल ऑनलाइन शॉपिंग बाजार में इन्वेस्ट कर अपनी पकड़ मजबूत करने की सोच रही हैं. दो बड़ी अमेरिकी कपनियां, अमेज़ॅन और वॉलमार्ट, भारत की लुक्रेटिवे ई-कॉमर्स मार्केट का ज़्यादा बड़ा हिस्सा पाने के लिए आपस में लड़ रही है।

2017 में एमेज़ॉनअमेरिका की नंबर वन ई-कॉमर्स साइट थी. इन्होंने केवल यूएस में ही 43% ऑनलाइन सेल की जो लगभग 197 बिलियन यूएस डॉलर के बराबर थी। ईबे और एप्पल के बाद सेल्स में वालमार्ट चौथे नंबर पर आई है, टोटल 3.6 % के साथ.

लेकिन जब ब्रिक-एंड-मोटर की बात आती है तो वालमार्ट आज भी किंग है. 2017 में जहां एमेज़ॉन ने 200 बिलियन डॉलर का बिज़नेस किया वहीं वॉलमार्ट ने 481 बिलियन डॉलर का बिज़नेस वर्ल्डवाइड किया (जिसमें 307 डॉलर केवल अमेरिका में कमाएं) दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर होने के चलते, वॉलमार्ट पहले से ही भारत की रिटेल मार्किट में अपनी जगह बना चुकी है। 2016  में वॉलमार्ट के सेल में 34% की बढ़ोतरी हुई और ये इंडिया को हज़ारो की संख्या में जॉब अपॉर्चुनिटी देकर, लोगों के फेवरेट बन रहे हैं।

लेकिन, अब वॉलमार्ट भारत की कंपनी फ्लिपकार्ट में इन्वेस्ट कर ई-कॉमर्स मार्किट में एमेज़ॉन की पकड़ कमज़ोर करना चाहती है। एमेज़ॉन कई सालों से फ्लिपकार्ट को भारत की टॉप ऑनलाइन रिटेलर की पोज़िशन से हटाने की कोशिश कर रहा है।

2017 मे एमेज़ॉन ने एमेज़ॉन इंडिया सेलर सर्विसेज़ में 2.7 बिलियन डॉलर इन्वेस्ट किए हैं, और अब उनकी ऑथोराइज़्ड कैपिटल दुगनी हो कर 4.74 बिलियन डॉलर हो गई है। 2017 में एमेज़ॉन की सेल्स 85% बढ़ी है और अब वह फ्लिपकार्ट के काफी नज़दीक पहुंच गई है। लेकिन, वालमार्ट फ्लिपकार्ट में बड़ी इन्वेस्टमेंट करना चाहता है और दोनों के बीच में इस बारे में बात चल रही है। वालमार्ट इस इन्वेस्टमेंट से फ्लिपकार्ट और एमेज़ॉन के बीच में बड़ा गैप बनाना चाहता है।

वॉलमार्ट अभी फ्लिपकार्ट के साथ एक डील पर काम कर रही है जिससे फ्लिकार्ट की वैल्यूएशन 20 बिलियन डॉलर  हो जाएगी। आज के समय इसकी वैल्यू 12 बिलियन डॉलर है। फ़िलहाल वालमार्ट फ्लिपकार्ट में 20% हिस्सेदारी चाहते हैं। क्योंकि वॉलमार्ट फ्लिपकार्ट को सपोर्ट कर रहा है, इसलिए एमेज़ॉन इंडिया को दूसरे स्थान पर रहने की आदत डालनी होगी।

इंडिया की तेज़ी से बढ़ने वाली ई-कॉमर्स मार्किट में इन्वेस्टिंग की क्षमता को समझने वाली अकेले अमेरिकी कंपनियां ही नहीं बल्कि एक बड़ी चाइनीज़ टेक कॉर्पोरेशन ने  भी अभी इंडिया के ई-कॉमर्स ग्रोसरी, बिग बास्केट, में 200 मिलियन डॉलर इन्वेस्ट किया है।

हमने ब्यूटी स्पेस में नेटिव  ब्रांड्स को बिल्ड करने वाली इंडियन वर्टीकल इंटीग्रेटेड कंपनी Quantified Commerce से बात की, के आखिर क्यों इंडिया की ई-कॉमर्स मार्किट इन्वेस्टमेंट के लिए इतनी ज़्यादा डिमांड में है।

Quantified Commerce के फाउंडर Agam Berry ने बताया, “इन्वेस्टमेंट के लिए आज भारत सबसे एक्साइटिंग जगह है। यह दुनिया की सबसे फास्टेस्ट ग्रोइंग ई-कॉमर्स मार्किट है और कुछ ही सालों में इसकी पहुंच 200 बिलियन डॉलर हो जाएगी, जो कि कुछ सालों पहले रही पोज़िशन की तुलना में ज़बरदस्त है। इसका क्रेडिट इंटरनेट और मोबाइल फ़ोन को जाता है और दोनों ही भारत में तेज़ी से बढ़ रहे हैं। जैसे-जैसे भारतीय ऑनलाइन आना शुरू करेंगे, वैसे वैसे उनकी शॉपिंग करने की क्षमता भी बढ़ेगी।

और इंडिया के बढ़ते ई-कॉमर्स मार्किट का फास्टेस्ट ग्रोइंग सेगमेंट है, ब्यूटी।

यही कारण है कि Quantified Commerce इंडिया की इकॉनमी में अच्छी पोज़िशन पर है। डिजिटल नेटिव ब्रैंड्स में इनका फोकस ब्यूटी और वेलनेस पर है, और क्योंकि यह वर्टिकली इंटीग्रेटेड हैं इसलिए सप्लाई चेन के हर स्टेप  के मालिक वो खुद हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट को कम करती है, जिससे ये अपने प्रोडक्ट्स को कस्टमर तक कम लागत में ऑफर कर पाते हैं।

बैरी कहते हैं, “कीमत की बात करें तो भारतीय बहुत ज़्यादा नापतोल करते हैं। अगर कोई ई-कॉमर्स कंपनी अच्छे दाम में प्रोडक्ट नहीं दे पा रही है तो वो उसमें ज़्यादा रुची नहीं दिखाएंगे। खुद की मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन होने के कारण हम अपने प्रोडक्ट पर ज़्यादा खर्च कर पाते हैं  नतीजा, हम बेहतरीन क्ववालिटी कम लागत में ऑफर करते हैं।

भारतीय ई-कॉमर्स मार्किट के सबसे बड़े खिलाड़ी होने के बावजूद एमेज़ॉन और फ्लिपकार्ट अपनी ई-कॉमर्स साइट के जरिए हाई टच एक्सपीरयंस ऑफर नहीं कर सकते। ऑनलाइन शॉपिंग करने वाला हमेशा पर्सनलाइज्ड एक्सपीरयंस पसंद करता है। ऑनलाइन शॉपिंग का नेचर ही ऐसा है की आप प्रोडक्ट टेस्ट नहीं कर सकते। यही कारण है कि Quantified Commerce सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ काम करता है ताकि वह उनके डेमोंस्ट्रेटीव और इम्पैक्टफुल वीडियो के जरिये अपने प्रोडक्स के यूज़ेस और रिजल्ट्स को दिखा सकें।

यदि फ्लिपकार्ट और वालमार्ट के बीच डील हो जाती है, जिसकी पूरी संभावना है, तो फिर एमेज़ॉन को अपनी स्ट्रेटेजी पर दुबारा विचार करना पड़ेगा। लेकिन, भारत में हो रहे लगातार इन्वेस्टमेंट से पता चलता है की देश में ई-कॉमर्स मार्किट की इवैल्यूएशन काफी ज़्यादा है। इसके जबरदस्त रेट से लगातार बढ़ने कि वजह से कंपनियां भी यह देख रही हैं कि इन्वेस्टमेंट के लिए यह सबसे अच्छा समय है।

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