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“अफ़वाहों से बचें”

अफवाहों के फ़ैलने से हम सबका जीवन प्रभावित होता है। समाज के अंदर ऐसे लोगों की कमी  नहीं जिनका कार्य अफवाहें फैलाकर लोगों का उल्लु बनाना होता है। इस घिनोने कार्य के पीछे उनका अपना कोई न कोई स्वार्थ छिपा रहता है और जिसे वह जनता के अंदर अफरा तफरी का माहौल पैदा करके पूरा करना चाहते हैं।

ऐसे लोग किसी के सगे नहीं होते और  वह देश और समाज के विकास में रोड़ा अड़ाने जैसा कार्य करते हैं। दूरदर्शन केंद्रों और समाचार पत्रों के माध्यम से कितनी बार ये बताने की कोशिश की गई है कि लोग मेलों और जलसों में तो जाएँ लेकिन अफ़वाहों पर बिना देखे यकीन न करें। लेकिन इस के बावजूद भी ऐसी घटनाएं देखने में आयी हैं जैसे किसी पुल आदि टूटने जैसी अफवाह के फैलने से लोगों में हड़बड़ मच गई और सैंकड़ों लोगों की मृत्यु हो गई।

व्यापार को लेकर भी एक दूसरे प्रतिद्वन्दी अपने वयापार बड़ाने के लिए दूसरे व्यापारियों के उत्पादन को घटिया साबित करने हेतु मिलावट होने जैसी गलत अफ़वाहों को फैलाने का काम करते हैं ताकि लोग केवल उनका समान ही खरीदें । कई बार ऐसी भी खबरें फेला दी जाती हैं जैसे नमक ख़त्म हो रहा है, प्याज़ खत्म हो रहा है और जनता भी बिना सत्य जाने  बड़े हुए दामों के साथ अधिक मात्रा में इन वस्तुओं को खरीदना शुरू कर देती है। इन अफवाहों से फ़ायदा केवल काला धंधा करने वालों का होता है, एक तो वो अपना पुराना सामान खत्म कर लेते हैं और दूसरा दुगने चौगुने दाम भी जनता से वसूल कर लेते हैं।
अभी-अभी जब सरकार द्वारा 1000 और 500 के नोटों को बंद किया गया तो छोटे नोटों की किलत होने के कारण बाज़ार में 10 रूपये वाले सिक्के प्रयोग में नज़र आने लगे लेकिन तभी किसी ने ये अफवाह फैला दी की 10 रूपये वाले नकली सिक्के भी बाजार में वितरण हो चुके हैं बस फिर क्या ये अफवा जंगल की आग की तरह फैल गई और दुकानदारों ने 10 -10 के सिक्के ग्राहकों से लेने बंद कर दिए जिस कारण आम जनता को कितनी परेशानी का सामना करना पड़ा।
राजनैतिक दल तो अक्सर अपनी पार्टी की छवि संवारने के लिए दूसरे दलों पर आरोप लगाने से नहीं चूकते, लेकिन हद तो तब हो जाती है जब ऐसी ही कुछ अफवाहों को सच का नकाब ओढ़ाते हुए लोगों को आपस में बाँटने का कार्य,कभी धर्म के नाम पर, कभी जात के नाम पर और कभो आरक्षण के नाम पर बांटने से भी नहीं चूकते जिससे देश का विकास तो क्या होगा पतन होना शुरू हो जाता है।
कई बार इंसान कुदरत के हादसों का शिकार तो होता ही है , जैसे भूचाल के आने से और बाढ़ के आने के कारण कितने लोगों की मृत्यु का होना और कितनी वस्तुओं का नष्ट हो जाना। परन्तु कितनी बार ऐसी घटनाओं का भी पता चला है की कई बार ऐसे ही हादसों में जब किसी के मरने की गलत अफवाह के फ़ैल जाने से उसके अपने माँ बाप या किसी सम्बधी की  सदमें से मौत हो जाती है तो उसके जीवन में  इस अफवाह के कारण जो मातम छा जाता है ऐसा मातम तो भूचाल या बाढ़ भी नहीं ला सकते। किसी के बारे में झूठी मौत की अफवाह से कितना ज़्यादा नुकसान हो सकता है ये अफवाहें फैलाने वाले सोच नहीं पाते।
इस लिए हम सबको सतर्क रहते हुए किसी भी अफवाह को बिना परखे स्वीकार नहीं करना चाहिए और इन का खुल कर खंडन करना चाहिए। आज कल तो व्हाट्स ऐप पर ऐसे भी संदेशों को भेजा जा रहा जिनसे लोगों की भावनाओं को भड़काने जैसा कार्य हो रहा है। ऐसे संदेशों को नकारें और आगे औरों को न भेजें।
आँख मूँद कर किसी भी बात को मानने से कई बार बहुत हानि होती है जिसकी भरपाई कर पाना बाद में मुश्किल हो जाता  है। इसलिए बेहतर होगा की अफवाहों से बचें और अपनी नासमझी के कारण किसी दुर्घटना का शिकार न हो बैठें। बिना सत्य को जाने अफ़वाहों पर यकीन न करें ।
ब्रिज किशोर भाटिया
Chandigarh