पूर्व के सुरों की मधुरता एवं पश्चिम के संगीतज्ञ के अद्भुत मेल से सजी केन्द्र की 249वीं बैठक

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चंडीगढ़
11 अगस्त 2018
दिव्या आज़ाद
भारत की प्रसिद्ध संागीतिक संस्था प्राचीन कला केन्द्र द्वारा आज यहां लगभग 20 वर्षो से चली आ रही मासिक बैठकों की श्रृंखला की 249वीं कड़ी को पश्चिम के कलाकारों द्वारा एक यादगारी शाम के रूप में प्रस्तुत किया । प्राचीन कला केन्द्र की रजिस्ट्ार डाॅ.शोभा कौसर,सचिव श्री सजल कौसर इंडियन नेशनल थियेटर के मानद सचिव श्रीमती विनीता गुप्ता भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। रशिया से आई आस्या ने बांसुरी एवं अर्जेनटाईना के पाबलो ग्रेस ने तबले की अपनी अद्भुत प्रस्तुति दी । दोनों की जुगलबंदी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
आस्या बांसुरी के साथ तबला एवं ड्म में भी बखूबी पारंगत है। इन्होंने पंडित अनिल दीक्षित,पंडित राधेश्याम शर्मा एवं पंडित विरेन्द्र मालवीय से तबला की शिक्षा प्राप्त की। इसके अलावा श्री राम सैंटर,नई दिल्ली से भी शिक्षा इन्होंने बांसुरी वादन की शिक्षा पंडित राजकिशोर दाल बहरा एवं पंडित कैलाश शर्मा से प्राप्त की ।
दूसरी ओर पाबलो ने आईसीसीआर के स्कालरशिप के तहत श्री राम भारतीय सैंटर से तबला वादन में शिक्षा प्राप्त की । उपरांत पंडित सरित दास एवं पंति विनोद लेले से शिक्षा प्राप्त की। दोनों ने भारत ही नहीं अमेरिका,अफ्रीका,रशिया,अर्जेनटाईना में विभिन्न प्रस्तुतियों दी है।
इन्होंने आज के कार्यक्रम की शुरूआत राग हंसध्वनि से की । जिसमें तीन ताल में आलाप,जोड़,झाला की सुंदर प्रस्तुति दी गई । बांसुरी की मधुर धुनों एवं तबले की थाप से दर्शकांे की खूब तालियां बटोरी ।
कार्यक्रम के अगले भाग में राग दुर्गा में निबद्ध झपताल में प्रस्तुति दी गई । इस खूबसूरत जुगलबंदी का समापन राग दुर्गा में निबद्ध मध्य लय तीन ताल से हुआ जिसे दर्शकों ने खूब सराहा । कार्यक्रम के अंत में रजिस्ट्ार डाॅ.शोभा कौसर सचिव श्री सजल कौसर इंडियन नेशनल थियेटर के मानद सचिव श्रीमती विनीता गुप्ता ने कलाकारों को उतरिया एवं पुष्प देकर सम्मानित किया ।

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